मैं भाग्य में बहुत विश्वास करता हूँ, जो भी जीवन में आपको प्राप्त होता है पूरी तरह से भाग्य के भरोसे ही मिलता है। 'सौभाग्य या दुर्भाग्य' वह कुछ भी हो सकता है। मैं तो कहूँगा अपने कर्म के जरिये जाने-अनजाने भाग्य को हम स्वयं ही बनाते हैं। कर्म पूरी ईमानदारी से हो तो 'सौभाग्य' और बेईमानी से हो तो 'दुर्भाग्य'। यहाँ अब स्वयं चिंतन की ज़रूरत है कि हमें अपने जीवन में सब अच्छा चाहिए या बुरा। जाहिर सी बात है स्वयं के लिए तो कोई भी बुरा नहीं चाहेगा। तो फिर सब अच्छा ही चाहिए तो ईमानदारी से कर्म करो किसी दूसरे के लिए नहीं अपने लिए और अपने भाग्य को प्रबल बनाओ।
स्वयं चिंतन
Monday, 1 July 2013
Thursday, 4 October 2012
पहला दिन
करीब 5 साल पहले मैंने कहीं पढ़ा था,
''आज का दिन तुम्हारी बची हुई ज़िन्दगी का पहला दिन है ''
यह कथन मुझे हर दिन सकारात्मक सोचने के लिए प्रेरित करता है। इस छोटे से कथन में बहुत बड़ा सार छुपा हुआ है। हम बेवजह छोटी छोटी बेकार की बातों में अपना समय व्यर्थ कर जीवन के अनमोल समय को गवां देते हैं। हर दिन को पहला दिन समझ कर खुलकर जियो क्योंकि ज़िन्दगी बहुत छोटी है और कम है। आप भी स्वयं चिंतन करें और अपने विचार व्यक्त करें।
''आज का दिन तुम्हारी बची हुई ज़िन्दगी का पहला दिन है ''
यह कथन मुझे हर दिन सकारात्मक सोचने के लिए प्रेरित करता है। इस छोटे से कथन में बहुत बड़ा सार छुपा हुआ है। हम बेवजह छोटी छोटी बेकार की बातों में अपना समय व्यर्थ कर जीवन के अनमोल समय को गवां देते हैं। हर दिन को पहला दिन समझ कर खुलकर जियो क्योंकि ज़िन्दगी बहुत छोटी है और कम है। आप भी स्वयं चिंतन करें और अपने विचार व्यक्त करें।
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